जो पाच पापो में लीन रहते है उन्हे क्या कहते है ?
पाँच पापों में लीन रहने वाले व्यक्ति को सामान्यतः “पाँच पापी” कहा जाता है (pañca pāpī)। ये पाँच पाप हैं:
- हिंसा (हिंसा/हिम्सा)
- असत्य (झूठ)
- चोरी (चोरी/अट्टदोना)
- काम-वासना से जुड़ा पाप (मैथुन या पापी आचरण)
- परिग्रह/माल-दौलत से मोह (परिग्रह या अभिमान)
ध्यान रहे कि चार मुख्य आत्म-पापों (कोष्ठ, क्रोध, लोभ, माया) के साथ पाँच पापी शब्द अलग-अलग संदर्भों में भी इस्तेमाल होता है, पर साधारण बोलचाल में जो पापों का समूह तय किया गया है, उसे पाँच पाप कहा जाता है।