सम्यक दर्शन के प्रभाव से किसे नौ निधियों और चौदह रत्नों का स्वामित्व मिलता है
संक्षेप उत्तर:
- सम्यक दर्शन के प्रभाव से Chakravarti (सम्राट, सार्वभौम चक्रवर्ती राजा) को नौ निधियाँ और चौदह रत्नों का स्वामित्व प्राप्त माना गया है। ये निधियाँ और रत्न उनके साम्राज्य और ऐश्वर्य के प्रतीक माने जाते हैं और उनकी रक्षा देव करते हैं। यह बात हरिवंशपुराण आदि Jain स्रोतों में वर्णित है, जहाँ भरत जैसे चक्रवर्ती राजा के उदाहरण दिए गए हैं। ( jainkosh.org)
- विशिष्ट नामों के साथ चौदह रत्नों और नौ निधियों की सूची आदि भी लोकप्रिय Jain ग्रंथों में दी गई है; ये सभी चक्रवर्ती राजाओं के वैभव-प्रतीक हैं, न कि सामान्य साधकों के लिए प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में समझना चाहिए। विभिन्न जैन परंपराओं (दिगंबर/श्वेतांबर) में इन निधियों/रत्नों के विचार समान रहते हैं, पर पाठों में विवरणों में थोड़े भेद मिलते हैं।
नोट: