पांच पाप को करने वाले को क्या कहते हैं
पाँच पाप करने वाले को सामान्यतः "पाँच पापी" कहा जाता है।
पाँच पाप की सूची (जैन साहित्य में सामान्य रूप से मान्य):
- हिंसा (हिंसा/Pranatipat)
- झूठ (मृशावादा/असत्य)
- चोरी (_adattadāna/चौर्य)
- मैथुन/कुषील (अप्रमाणिक यौनाचार)
- परिग्रह (संपत्ति के आसक्ति, अवरुद्धjar)
क्योंकि ये पांचों पाप मिलकर कर्म बंधन बनाते हैं, इन्हें करने वाले व्यक्ति को पंच पापी कहा जाता है। कुछ जगह कुशील को शुद्धार्थ (यौनाचार के अनुचित आचरण) के रूप में भी समझा जाता है; इसे तौर-तरीकों में कुछ भेद Digambar बनाम Śvetāmbara परंपराओं में हो सकता है, पर मुख्य पाँच पाप की सूची समान ही रहती है।