कानन जाये में जाए योग प्रभु लीन्हा in jainism kis kalayank h
संक्षेप में जवाब यह है:
- Jain धर्म के अनुसार समय दो हिस्सों में चलता है: utsarpiṇī (ascending) और avasarpiṇī (descending)। हर हिस्से में छह समय-अर (ara) होते हैं। इस पूरे चक्र को kalpa कहा जाता है। वर्तमान समय avasarpiṇī, यानी गिरते हुए/पतनशील दौर के अंदर है। ( en.wikipedia.org, wisdomlib.org)
- इस avasarpiṇī के भीतर अभी पांचवा अर (Pancham Aara) चल रहा है। इसे अक्सर Pancham Aara कहा जाता है, जिसका जीवनकाल 21,000 साल माना गया है और यह दौर निधन-उत्थान के क्रम में अपेक्षाकृत अधिक दुख-ह्रास वाला होता है। इस पंचम अ ara के शुरू होने का संबंध महावीर के निर्वाण के बाद काल-गणना से किया जाता है। इसलिए आप जिसे “कौन सा काल” पूछ रहे हैं, वह avasarpiṇī का पाँचवाँ Ara है। ( jainknowledge.com, en.wikipedia.org)
- यह व्यवस्था Digambar और Shwetambar के बीच साधारण तौर पर एकसमान रहती है; दोनों के मूल-सिद्धांत में ark (ara) और avasarpiṇī/utsarpiṇī की धारणा समान है, हालांकि कुछ भाष्य-व्याख्याओं में विवरणों में नर्मी या शब्द-भेद मिलते हैं। सामान्यत: दोनों में वर्तमान अवस्था avasarpiṇī, पाँचवाँ Ara (पंचम अारा) है। ( wisdomlib.org)
अगर आप चाहें तो मैं इस विषय का सरल सार, और हर ara के मुख्य लक्ष्ण (उदा. सुख-दुख, आयु-लंबाई आदि) एक छोटी सूची के रूप में दे दूँ।