जिन्सह्सृनाम स्तोत्र मे किन तीर्थंकर की वन्दना होती है
जिनश्र्न स्तोत्र (Jinasrnam/Jinashrnam Stotra) में सभी 24 तीर्थंकरों की वंदना होती है। यह स्तोत्र समष्टि तीर्थंकरों के गुणों और महत्त्व को समर्पित होता है, न कि सिर्फ किसी एक तीर्थंकर की।
श्रद्धा-प्रवाह:
- आम तौर पर इस प्रकार के स्तोत्र सभी 24 तीर्थंकरों की महिमा का गुणगान करते हैं और मार्गदर्शक अनुशासन के लिए प्रेरित करते हैं। Digambar बनाम Shwetambar परंपराओं में भाषा या क्रम में थोड़ा अंतर हो सकता है, पर मूल उद्देश्य समान रहता है: सभी तीर्थंकरों की वंदना और उनके पथ का स्मरण।
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नोट: अगर आप चाहें तो मैं इस स्तोत्र के मूल Devanagari पाठ और अर्थ (arth) Digambar/Shwetambar दोनों परंपराओं के अनुसार साझा कर सकता/सकती हूँ।