jain mantras for wealth
In Jainism, there is no separate “money mantra” made only for getting wealth.
All Jain mantras are mainly for:
- destroying karma,
- purifying the soul,
- bringing mangal (auspiciousness) in life.
When punya (good karma) and obstacles-reducing karma increase, then as a side-effect you may get:
- better opportunities,
- stability in business/job,
- respect, peace at home etc.
Below are the main mantras/stotras many Jains use when they are worried about wealth, work or success:
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1. Navkār (Namokār) Mahāmantra – for all-round mangal
Text (Prakrit):
णमो अरिहंताणं। णमो सिद्धाणं। णमो आयरियाणं। णमो उवज्झायाणं। णमो लओए सव्वसाहूणं।
एसो पंच णमोकारो, सव्वपावप्पणासणो। मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवई मंगलं॥
सरल अर्थ: मैं अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और सभी साधुओं को नमस्कार करता हूँ। इन पाँच परमेष्ठियों को नमस्कार करने वाला यह मंत्र सभी पापों को नष्ट करने वाला है और सभी मंगलों में पहला मंगल है।
कैसे करें (wealth / success के लिए भी):
- रोज सुबह व रात को कम से कम 9, 27 या 108 बार शुद्ध भाव से जपें।
- भाव रखें: “मेरे अशुभ कर्म कम हों, मुझे सही निर्णय, ईमानदार कमाई और अहिंसक जीवन की शक्ति मिले।”
इस मंत्र का प्रभाव सीधा धन माँगने का नहीं, बल्कि अंदर की शुद्धि व सही मार्ग देने का है, जिससे जीवन स्वाभाविक रूप से स्थिर और सफल होता है। आप Navkār मंत्र के बारे में विस्तार से यहाँ पढ़ सकते हैं
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2. Bhaktāmbar Stotra – बाधाएँ हटाने, हिम्मत व सफलता के लिए
- यह संस्कृत स्तोत्र है, भगवान आदिनाथ की स्तुति है।
- दोनों परंपराओं (दिगंबर–श्वेतांबर) में मान्य है।
- परंपरा से लोग इसके कुछ विशेष श्लोक पढ़ते हैं:
व्यवहार में:
- रोज 1–5 श्लोक से शुरुआत कर सकते हैं।
- कोई बड़ा काम, मीटिंग, एग्ज़ाम या बिज़नेस निर्णय हो, तो:
ध्यान रहे: भगवान “पैसा देने” नहीं, बल्कि अज्ञान, डर और आलस्य हटाने की प्रेरणा देते हैं, जिससे हमारा प्रयास सही दिशा में हो।
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3. Uvasaggaharam (Uvasaggaram) Stotra – कष्ट व रुकावट दूर करने के लिए
यह प्राकृत स्तोत्र है, भगवान पार्श्वनाथ की स्तुति है। कई लोग इसे:
- बीमारी,
- भारी परेशानी,
- कोर्ट–केस, बिज़नेस संकट आदि में
पहली पंक्ति (एक सामान्य रूप):
उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्मघण-मुक्कं। विसहर-विस-निण्णासं, मंगल-कल्लाण-आवासं॥
सरल अर्थ: मैं ऐसे प्रभु पार्श्वनाथ को नमस्कार करता हूँ जो भारी कर्मों को नष्ट करते हैं, विष जैसे दुखों को समाप्त करते हैं और जो मंगल और कल्याण के निवास हैं।
इसे रोज 8, 21 या 108 बार जपा जाता है (अपनी क्षमता के अनुसार)। विस्तार से पाठ यहाँ देख सकते हैं
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जैन दृष्टि से “Wealth” को सही तरह कैसे देखें?
जैन धर्म के अनुसार:
- सच्ची संपत्ति
- सम्यक दर्शन (सही श्रद्धा) - सम्यक ज्ञान (सही समझ) - सम्यक चारित्र (सही आचरण)
- बाहरी धन (money, fame आदि)
- यह पूरी तरह पूर्व जन्म के कर्म + वर्तमान के पुरुषार्थ पर निर्भर है। - बहुत अस्थायी है; कभी भी छिन सकता है।
- केवल लालच से मंत्र करना
- “बस पैसा चाहिए, और कुछ नहीं” – ऐसा भाव नया कर्मबंधन बढ़ा सकता है। - इसलिए मंत्र जपते समय भाव रखें: “मेरी भूलें कम हों, मैं अहिंसा व सत्य से कमाऊँ, सब जीवों का कल्याण हो।”
आप इसी विषय पर यह उत्तर भी पढ़ सकते हैं
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धन और सफलता के लिए जैन-ढंग की रोजमर्रा साधना
- सुबह
- स्नान के बाद, शांत स्थान पर बैठकर - 9, 27 या 108 बार नवकार मंत्र - फिर 1–2 श्लोक भकतामर या उवसग्गहरं।
- दिन भर के व्यवहार में
- झूठ, धोखा, मिलावट, अनावश्यक हिंसा से बचें। - विनम्रता से बोलें, ज़रूरतमंद की मदद करें, धर्म में यथाशक्ति दान करें।
- रात को
- छोटा सा अल्प-प्रतिक्रमण – दिन में हुई हिंसा, झूठ, क्रोध आदि के लिए मन ही मन क्षमा माँगे। - 1 बार नवकार मंत्र करके सोएँ।
ऐसी साधना + ईमानदार मेहनत से अंदर की शांति, स्थिर बुद्धि और शुभ कर्म बढ़ते हैं। यही जैन धर्म के अनुसार सच्चा “wealth mantra” है – जो भीतर और बाहर, दोनों तरह की समृद्धि की नींव बनाता है।