पानी से कर्म किसने बांधे in jainism
जैन दृष्टि से “पानी से कर्म किसने बाँधे?” का सीधा उत्तर:
पानी से किसी ने भी कर्म नहीं बाँधे। कर्म हमेशा जीव (आत्मा) खुद अपने भावों से बाँधता है।
थोड़ा सरल समझिए:
- कर्म‑बंधन का कारण है –
- बाहर की चीज़ें – जैसे पानी, खाना, कपड़ा, पैसा, घर – अपने आप कर्म नहीं बाँधते।
- जब इनके प्रति आसक्ति, लोभ, अहंकार, मोह आता है, तब उन भावों से कर्म बँधता है।
इसलिए अगर कोई पूछे: “पानी से कर्म किसने बाँधे?” तो जैन उत्तर यही है: “तुमने (अपने ही अशुद्ध भावों से) कर्म बाँधे हैं, पानी ने नहीं।”
कर्म‑बंधन कैसे होता है, इसे और अच्छे से आप यहाँ पढ़ सकते हैं: कर्म बंधन कैसे होता है और कर्म बंधन कैसे होता है? (हिंदी में)