Suta Samai samkit samaik Desh vriddhi ine sabse utkrishtata Samajik kaun si
आपके शब्दों का आशय यह लगता है: “सूत्र/समय, समकित (सम्यक दर्शन), सामायिक, देश-विरति — इनमें ‘समाजिक’ दृष्टि से सबसे उत्तम क्या है?” संक्षेप में और परंपरानुसार उत्तर:
- समकित (सम्यक दर्शन): मोक्षमार्ग का प्रथम और सर्वोच्च मूलाधार। इसके बिना आगे की कोई साधना फलदायी नहीं मानी जाती।
- देश-विरति: आंशिक विरति का उच्च आध्यात्मिक चरण (5वां गुणस्थान)। यह समकित के बाद आता है; गृहस्थ के लिए यह श्रेष्ठ प्रगति का सूचक है।
- सामायिक: 48 मिनट की समता-साधना, जो राग-द्वेष शान्त करके अहिंसा, क्षमा, स्व-निरिक्षण को जीवन में उतारती है। यह देश-विरति तक पहुँचने की मुख्य साधना है।
- “सूत्र/समय”: शास्त्र-अध्ययन और समय-पालन सहायक साधन हैं; ये अलग “चरण” नहीं हैं।
उत्कृष्टता का क्रम (आध्यात्मिक दृष्टि से) 1) समकित सबसे प्रधान, 2) उसके बाद देश-विरति उच्चतर अवस्था, 3) सामायिक — दोनों तक ले जाने वाली अनिवार्य साधना।
समाजिक (लोक-कल्याण) दृष्टि से
- सामायिक सबसे प्रभावी मानी जाती है, क्योंकि यह दैनिक जीवन में अहिंसा, समता, क्षमा और संयम को सक्रिय करती है; परिवार–समाज में सौहार्द बढ़ाती है। परन्तु सिद्धान्ततः समकित ही वह आधार है जिससे ऐसी सदाचारिणी सामाजिकता जन्म लेती है।
परंपरा-भेद
- दिगंबर–श्वेतांबर दोनों में यह तात्त्विक क्रम समान है: समकित मूल, देश-विरति आगे का चरण, सामायिक उसकी साधना। विधि–पाठ (सामायिक की रीतियाँ, कुछ सूत्र) में हल्का भेद मिल सकता है; भाव एक ही है — समता और अहिंसा।
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