Suta samaik deshdi Samay kitne Samay Tak ine sab se utkrusht Samajik kaun sa
लगता है आप “समायिक/प्रतिक्रमण के समय” और “कौन‑सा सर्वोत्तम है” पूछ रहे हैं। सरल तथा पारंपरिक उत्तर:
- Samayik (समायिक) का समय: सामान्यतः 1 मुहूर्त = 48 मिनट. इच्छानुसार 2–3 मुहूर्त तक भी कर सकते हैं। यह दोनों परंपराओं (श्वेतांबर–दिगंबर) में समान रूप से मान्य है।
- Devasi/Rai Pratikraman (देवासी/राई प्रतिक्रमण) का समय:
- “Sutra paath” (सूत्र‑पाठ): इसका अलग से निश्चित समय नहीं; यह समायिक/प्रतिक्रमण के भीतर ही किया जाता है। इसलिए इसका समय वही रहता है जो उस साधना का है।
- “सबसे उत्कृष्ठ” क्या?
टिप्पणी (परंपरागत भेद):
- श्वेतांबर में देवासी/राई प्रतिक्रमण का समय सूर्यास्त/सूर्योदय के सापेक्ष रखा जाता है; दिगंबर में भी कालानुसार साधना होती है, पाठ और क्रम कुछ भिन्न हो सकते हैं, पर समायिक का मानक मुहूर्त (≈48 मिनट) दोनों में समान है। दिगंबर विधि का संक्षेप:
निष्कर्ष: समायिक का मानक समय 48 मिनट है; प्रतिक्रमण सुबह‑शाम नियत समय पर, अवधि परंपरा के अनुसार बदलती है। श्रेष्ठ वही, जो सम्यक् भाव से, नियमपूर्वक और एकाग्र चित्त से किया जाए।