Mere dukh ke dino main woh stavan
यदि “दुख के दिनों में कौन‑सा स्तवन पढ़ूँ” पूछ रहे हैं, तो परंपरागत रूप से ये सबसे प्रभावी माने जाते हैं:
- Uvasaggaharam Stotra (ऊवसग्गहरं) — संकट, रोग, भय और उपसर्ग दूर करने के लिए। यह भगवान पार्श्वनाथ की स्तुति है और दोनों परंपराओं (दिगंबर‑श्वेतांबर) में आदरपूर्वक पढ़ा जाता है। सार: “हे पार्श्व प्रभु! आप उपसर्गों का नाश करने वाले, मंगल के धाम हैं; जो श्रद्धा से स्मरण करे, उसके दुख‑रोग‑भय क्षीण हों।” प्रथम पंक्ति:
- Namokar Mantra (णमोकार मंत्र) — समस्त पापों का नाश करने वाला पंचपरमेष्ठी वंदन। किसी भी दुख में सबसे पहले यही जपा जाता है। सार: “मैं अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और समस्त साधुओं को नमन करता हूँ; यह पंचनमस्कार सभी पापों का नाश करता है।”
- Bhaktamar Stotra (विशेषतः श्वेतांबर परंपरा में) और Logassa (दिगंबर परंपरा का प्रभु-वंदन) भी श्रद्धा से पढ़े जाते हैं; उद्देश्य वही—भगवंत के गुणों का स्मरण कर अंतःकरण को निर्भय और शांत करना।
कैसे करें
- स्वच्छ स्थान पर शांत मन से, एकाग्रता और सम्यक् श्रद्धा के साथ पाठ करें।
- पहले नमोकार मंत्र, फिर ऊवसग्गहरं का पूर्ण पाठ करें।
- अंत में “क्षमापना” और “मैत्रीभाव” रखें—यही जैनधर्म का आत्मिक सार है।
नोट
- अर्थ और भावना जैन आगम परंपरा के अनुरूप हैं; दिगंबर‑श्वेतांबर दोनों में Uvasaggaharam और Namokar का प्रयोजन समान है—उपसर्ग-क्षय, शांति और साधना की दृढ़ता।